ओवरलोडिंग से संबंधित हालिया मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), लखनऊ के संज्ञान में ओवरलोडिंग से संबंधित कुछ मीडिया रिपोर्टें आई हैं, जिनके संदर्भ में निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जा रहा है:
FASTag अधिकृत बैंकों अथवा थर्ड-पार्टी वेंडरों द्वारा वाहन मालिकों को वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) तथा KYC संबंधी आवश्यक औपचारिकताओं के पूर्ण होने के उपरांत जारी किया जाता है। FASTag जारी करने की प्रक्रिया में टोल एजेंसी की कोई भूमिका नहीं होती है।

जब कोई वाहन टोल प्लाज़ा पर पहुंचता है, तो उस पर लगा FASTag स्वतः स्कैन हो जाता है। इसके बाद प्रणाली द्वारा FASTag का सत्यापन किया जाता है, टोल शुल्क स्वतः कट जाता है तथा वाहन को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी जाती है। यह प्रक्रिया पूर्णतः स्वचालित है तथा टोल ऑपरेटर को सिस्टम में वाहन संबंधी जानकारी में किसी प्रकार का परिवर्तन करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं होता है। यह समस्त लेन-देन बैंक द्वारा जारी FASTag में उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही संपन्न होता है।
यदि Weigh-in-Motion (WIM) प्रणाली अथवा किसी स्थिर वेब्रिज पर कोई वाहन ओवरलोड पाया जाता है, तो उस पर लागू ओवरलोडिंग शुल्क टोल एजेंसी द्वारा अलग से वसूला जाता है। इस संबंध में FASTag में उपलब्ध जानकारी के आधार पर ही रसीद भी जारी की जाती है।
FASTag में गलत जानकारी, वाहन पर गलत नंबर प्लेट अथवा ओवरलोडिंग जैसे मामलों की जांच की जिम्मेदारी राज्य परिवहन विभाग तथा ट्रैफिक पुलिस की है।







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