बोले, एक बेटी की मौत पर राजनीति नहीं करनी चाहिए
अखिलेश की सरकार के दौरान 1000 दंगे हुए, मुजफ्फरनगर जल रहा था, वे सैफई में कार्यक्रमों में व्यस्त थे : राजभर
‘खाता न बही, जो अखिलेश कहें वही सही’, उनकी आदत रही है कि वे चाहते हैं कि प्रदेश में दंगे हों, कर्फ्यू लगे
पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का चेक, डेढ़ बीघा जमीन के पट्टे की प्रति और मुख्यमंत्री आवास
बेटी के पिता ने कहा, बेटी की मौत पर लोग राजनीति न करें
15 लोगों को जाने की अनुमति थी, इसके बावजूद 250 लोग पहुंच गए, जिससे माहौल बिगड़ गया
लखनऊ, 26 अप्रैल : गाजीपुर के कटारिया गांव की घटना को लेकर पंचायती राज मंत्री ने समाजवादी पार्टी पर प्रदेश का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक बेटी की मौत पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, जबकि सरकार ने पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता और आवास उपलब्ध कराया है। राजभर ने यह भी कहा कि सीमित अनुमति के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से माहौल खराब हुआ।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि गाजीपुर के कटारिया गांव का मामला एक बेटी से जुड़ा है। एक युवक से अनबन होने के बाद वह शाम को घर से निकली। गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों में वह अकेले जाते हुए दिखाई दी। इसके बाद उसने गंगा में कूदकर जान दे दी।
उस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के लोग पूरे प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं, साथ ही गाजीपुर का वातावरण भी बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पीड़ित पिता ने भी पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताते हुए कहा है कि वे कार्रवाई से संतुष्ट हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मैं गाजीपुर के कटारिया गांव गया था। वहां पहुंचने के बाद पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये का चेक, डेढ़ बीघा जमीन के पट्टे की एक प्रति और मुख्यमंत्री आवास प्रदान किया गया।
लेकिन जब बात समाजवादी पार्टी की आती है, तो उनके प्रतिनिधिमंडल के लिए डीएम और एसपी के माध्यम से केवल 15 लोगों को जाने की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद वहां लगभग 250 लोग पहुंच गए और सभी के जाने की जिद करने लगे। जब 15 से अधिक लोग जाने लगे, तो विरोध हुआ और इसके बाद पथराव की घटना हुई, जिससे माहौल और बिगड़ गया।
उन्होंने कहा कि इस घटना की जानकारी होने पर हमने मुख्यमंत्री योगी को अवगत कराया। इसके बाद प्रशासन के अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से बातचीत की। बातचीत के बाद परिवार, पिता ने कहा कि उनकी बेटी की मौत पर लोग राजनीति न करें। उनका कहना है कि यदि राजनीति करनी है, तो अन्य घटनाओं पर भी ध्यान दिया जाए, क्योंकि ऐसी घटनाएं अन्य स्थानों पर भी हो रही हैं।
पंचायती राज मंत्री ने कहा कि बाराबंकी में एक राजभर की हत्या कर दी जाती है, तो वहां अखिलेश यादव जी नहीं जाते हैं। देवरिया में राजकुमार चौहान को गोली मार दी जाती है, तब भी वे वहां नहीं जाते। कौशांबी में एक पाल समाज की बेटी के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी जाती है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आती है, फिर भी अखिलेश यादव वहां नहीं जाते।
लेकिन मैं अखिलेश से कहना चाहूंगा कि आप विदेश में पढ़े हैं और उत्तर प्रदेश में पांच साल मुख्यमंत्री भी रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सब मानते हैं, अदालत भी उसे स्वीकार करती है। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि मृत्यु डूबने से हुई है। यदि यह प्रेम संबंध का मामला था, तो मोबाइल और चैट की जांच हो, सीसीटीवी फुटेज भी देख ली जाए।
लेकिन लखनऊ में बैठकर यह कह देना कि हत्या हुई है या दुष्कर्म हुआ है, जबकि मेडिकल रिपोर्ट इसकी पुष्टि नहीं करती, उचित नहीं है। यह वैसा ही है कि ‘खाता न बही, जो अखिलेश कहें वही सही’।
इस बात से अखिलेश को सोचना चाहिए कि एक बेटी की मौत पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए। यह सही तरीका नहीं है कि आप प्रदेश के शांत माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करें। गाजीपुर के लोग अमन-चैन से रह रहे हैं, और वहां माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा है। आपस में टकराव पैदा करने की कोशिश ठीक नहीं है।
अगर वास्तव में संवेदनशीलता दिखानी है, तो बाराबंकी जैसे मामलों में भी जाना चाहिए, जहां एक राजभर की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। मामूली विवाद, जैसे आइसक्रीम के पैसे को लेकर, में धारदार हथियार से हत्या कर दी गई, लेकिन वहां कोई नहीं जाता।
राजकुमार चौहान की दिनदहाड़े हत्या हो रही है, उन्हें गोली मारी जा रही है, फिर भी वहां नहीं जाते। कौशांबी भी नहीं जाते, जबकि वहां आए दिन घटनाएं हो रही हैं। लेकिन जहां उनके लोगों से जुड़ा विवाद होता है, वहां जरूर जाते हैं ताकि माहौल बिगड़े।
क्योंकि उनकी आदत रही है कि वे चाहते हैं कि प्रदेश में दंगे हों, कर्फ्यू लगे। जबकि योगी जी के शासन में अमन-चैन है, कहीं न कर्फ्यू है और न ही दंगे।
अखिलेश की सरकार के दौरान रिकॉर्ड में लगभग 1000 दंगे हुए और 1200 लोगों की जान गई। उस समय मुजफ्फरनगर जल रहा था, लोग पलायन कर रहे थे, जबकि वे सैफई में कार्यक्रमों में व्यस्त थे।
उन्होंने कहा कि गाजीपुर के लोग सूझबूझ का परिचय दे रहे हैं। वहां अमन-चैन है। परिवार का भी कहना है कि उनकी बेटी की मौत पर कोई राजनीति करने न आए। इससे अखिले








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