भारत ने फ्रांस को 114 नए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए औपचारिक अनुरोध (Letter of Request – LoR) भेज दिया है। इस सौदे की अनुमानित कीमत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है, जिससे यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े रक्षा सौदों में शामिल हो सकता है।
🎯 भारत को इतने राफेल क्यों चाहिए?
भारतीय वायुसेना (IAF) के पास वर्तमान में जितने फाइटर स्क्वाड्रन होने चाहिए, उससे कम हैं। कई पुराने मिग और अन्य विमान धीरे-धीरे रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता बढ़ गई है।
राफेल विमान:
- दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से हमला कर सकता है
- हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार की लड़ाई में सक्षम है
- आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है
- चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर रणनीतिक बढ़त दे सकता है
🇮🇳 “मेक इन इंडिया” को बड़ा फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार 114 विमानों में से लगभग 90 विमान भारत में बनाए या असेंबल किए जा सकते हैं। इससे:
- हजारों रोजगार पैदा होंगे
- भारतीय रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा
- विदेशी निर्भरता कम होगी
- नई तकनीक भारत में आएगी
💰 कितना बड़ा है यह सौदा?
₹3.25 लाख करोड़ की लागत के साथ यह सिर्फ विमान खरीद नहीं है। इसमें शामिल हैं:
- फाइटर जेट्स
- मिसाइल सिस्टम
- स्पेयर पार्ट्स
- ट्रेनिंग
- रखरखाव और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर








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