“एआई सखियां” बनेंगी गांव की डिजिटल दीदी,महिलाओं को मिलेगा रोजगार और नई पहचान
राजातालाब।अब गांव की महिलाएं भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक की जानकार बनेंगी। सेंटर फॉर सोशल एंड बिहेवियर चेंज, अशोका विश्वविद्यालय द्वारा “एआई सखी सशक्तिकरण पहल” के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को “एआई सखी” के रूप में तैयार करना है। ये सखियां गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चल दूरभाष, कंप्यूटर और ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग की जानकारी देंगी।
राजातालाब।अब गांव की महिलाएं भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक की जानकार बनेंगी। सेंटर फॉर सोशल एंड बिहेवियर चेंज, अशोका विश्वविद्यालय द्वारा “एआई सखी सशक्तिकरण पहल” के तहत उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।इस पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को “एआई सखी” के रूप में तैयार करना है। ये सखियां गांव-गांव जाकर अन्य महिलाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चल दूरभाष, कंप्यूटर और ऑनलाइन सेवाओं के उपयोग की जानकारी देंगी।
पहले चरण में जिले के 8 विकास खंडों में 500 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में महिलाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बुनियादी समझ, डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के बाद ये एआई सखियां अन्य महिलाओं को भी तकनीक से जोड़कर उन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाएंगी।विकास खंड आराजीलाइन में इस पहल की शुरुआत हो चुकी है। यहां विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की 65 महिलाओं को दो पाली में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्लॉक मिशन प्रबंधक समर बहादुर ने बताया कि प्रशिक्षण में महिलाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, डिजिटल कार्यों में इसकी भूमिका और स्वरोजगार व आजीविका में इसके संभावित प्रयोगों के बारे में बताया जा रहा है।खंड विकास अधिकारी सुरेंद्र सर ने कहा कि इस प्रशिक्षण से महिलाएं डिजिटल क्षेत्र में कदम रखेंगी और स्वरोजगार के नए अवसर पा सकेंगी। यह पहल महिलाओं के कौशल विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।







Users Today : 10
Users Yesterday : 77