गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’
योगी सरकार नई पीढ़ी को बनाएगी गो संरक्षण के प्रति सजग
बच्चों के मन में गो माता के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए गांव गांव चलेगा अभियान
तैयार किए जाएंगे मास्टर ट्रेनर, देंगे अन्य ट्रेनर को प्रशिक्षण
गो संरक्षण में रुचि रखने वालों को दी जाएगी वरीयता
लखनऊ, 16 अगस्त : योगी सरकार की प्रदेश में गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को भी जोड़ने की तैयारी है। गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित होंगे और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है।
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों। इसी सोच के तहत गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश
गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि नई पहल में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर रहेगा। गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को भी समझे। अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस व्यवस्था के जरिए गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है। गो संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश
उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। योगी सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि की है। प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।
1.15 लाख पशुपालकों को सौंपे गए करीब 1.85 लाख गोवंश
गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में भी देश में पहले स्थान पर है। सरकार अब इस क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।
गोशाला से गो आधारित उद्योग तक बढ़े कदम
सरकार की रणनीति गोशालाओं को धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। इससे महिलाओं के लिए गांव में ही स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। जो गोबर पहले सामान्य अपशिष्ट के रूप में देखा जाता था, वही अब खाद, ऊर्जा और विभिन्न उत्पादों के जरिए आय का साधन बन रहा है।
हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल की है। इसके पीछे उद्देश्य अलग-अलग जिलों की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गो-आधारित आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है।
योजना है कि किसी जिले में गोबर से बायोगैस की संभावना बेहतर है तो वहां उस पर जोर दिया जाए, जबकि दूसरे जिले में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जाएं। सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ना और गांवों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।
यूपी में दिखता है बदलाव, मजबूत नेतृत्व से कानून व्यवस्था में बढ़ा लोगों का भरोसाः नाना पाटेकर
विख्यात अभिनेता नाना पाटेकर ने की यूपी की कानून व्यवस्था की सराहना, बोले- योगी सरकार ने लोगों की सुरक्षा को दी सर्वोच्च प्राथमिकता
उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे अभिनेता नाना पाटेकर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस को आधुनिक संसाधन, नई तकनीक और आत्मविश्वास मिला
कहा- 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सुरक्षा आसान नहीं, दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट नीति से मजबूत हुई प्रदेश की कानून व्यवस्था

लखनऊ, 16 अगस्त। प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की जमकर सराहना की. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने बड़े और विविधताओं से भरे प्रदेश में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है और इसके सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने कहा कि लगभग 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस को आधुनिक संसाधन, नई तकनीक और आत्मविश्वास प्रदान किया गया है, जिससे कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। नाना पाटेकर ने कहा कि पिछले कई दशकों में उन्होंने उत्तर प्रदेश में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है, प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है और सरकार की कार्यशैली में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है। उन्होंने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक होगी, नागरिक उतना सुरक्षित होगा और नागरिक जितना जागरूक होगा, अपराधियों के लिए काम करना उतना ही कठिन हो जाएगा।
नाना पाटेकर ने साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे बढ़ते खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध आज एक वास्तविक चुनौती है और इसका शिकार कोई भी हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डराने और पैसे मांगने का प्रयास करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, बल्कि लोगों का डर होता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा डिजिटल अरेस्ट के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बनाई गई फिल्म की भी सराहना की और कहा कि यदि कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सकती है या किसी बुजुर्ग को ठगी से बचाया जा सकता है, तो इससे बड़ा सामाजिक योगदान और कुछ नहीं हो सकता।
नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के पास फिल्मों की तरह रीटेक का अवसर नहीं होता। उन्हें कठिन परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेने पड़ते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस जनता के भरोसे को आगे भी बनाए रखेगी तथा प्रदेश को और अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।








Users Today : 15
Users Yesterday : 28