बेशकीमती भूमि के मामले में फ़ौजदारी निगरानी निरस्त
विचरण न्यायालय का आदेश बरकरार
वाराणसी के दो कानूनगो और लेखपाल को बड़ी राहत
निगरानी याचिका ख़ारिज
वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश एफ. टी. सी.( 14वॉ वित्त आयोग) श्री मनोज कुमार- द्वितीय की अदालत ने फ़ौजदारी निगरानी संख्या-05/2026 जितेंद्र कुमार मौर्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार आदि मामले में निगरानी खारिज कर दी। मामला पिंडरा तहसील के राजस्व निरीक्षक व लेखपाल और राजातालाब तहसील के राजस्व निरिक्षक से संबंधित है। अदालत में सरकारी राजस्व कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता धीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, डॉ. देवेश श्रीवास्तव, चन्द्र कांत सिंह और सारांश श्रीवास्तव ने पैरवी की।
मामले में परिवादी जितेंद्र कुमार मौर्य ने आरोप लगाया था कि विपक्षी पिंडरा तहसील के बैजलपट्टी के लेखपाल सुशील कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन कानूनगो योगेन्द्र कुमार सिंह और उनके ट्रांसफर के बाद आये राजस्व निरिक्षक भोला शंकर गौतम ने अपने पद व कर्तव्यों का दुरूपयोग कर उनके विपक्षीयों को लाभ देने के लिये एवं उनकी साजिश में शामिल होकर पूर्णरूपेण फर्जी एवं कूटरचित रिपोर्ट प्रशासन को दिया था, जिसकी वज़ह से परिवादी की कीमती जमीन की बेईमानी हो गयी और उसपर विपक्षीयो ने निर्माण भी कर लिया।
निगरानीकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, वाराणसी द्वारा प्रकिर्ण प्रार्थना पत्र संख्या 3635/2025, जितेन्द्र कुमार मौर्य बनाम सुशील कुमार श्रीवास्तव वगैरह में पारित आदेश दिनांक 12.12.2025 से क्षुब्ध होकर वाद योजित किया हैं, जिसमें विचरण न्यायालय द्वारा निगरानी कर्ता का प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 173(4) बी. एन. एस. एस. निरस्त किया गया हैं।
निगरानी कर्ता द्वारा प्रस्तुत दाण्डिक निगरानी में मुख्य रूप से प्रार्थना किया गया था कि कूट रचित दस्तावेज के आधार पर बैनामा हुआ और निगरानी कर्ता की जमीन पर अवैध कब्ज़ा निर्माण कर पूर्णरूपेण अपराध कारित किया गया, उक्त समस्त परिस्थितियों का एवं साक्ष्यो का विचारण न्यायालय द्वारा न तो परिशीलन किया गया और न ही उसके पास मौजूद साक्ष्यो को कोई महत्व दिया गया और विधि विरुद्ध तरीके से प्रश्नगत आदेश पारित कर दिया गया।
अदालत ने निगरानी कर्ता के विद्वान् अधिवक्ता गण की बहस और विपक्षी गण के विद्वान् अधिवक्ताओ की बहस सुनने, विचरण न्यायालय द्वारा निरस्त किये गये अंतर्गत धारा 173(4) बी. एन. एस. एस. अवलोकन करने के बाद पाया की निचली अदालत के आदेश में कोई विधिक अथवा तथ्यात्मक त्रुटि नहीं है। इसलिए फ़ौजदारी निगरानी स्वीकार किये जाने योग्य नहीं हैं एवं आदेश हुआ की प्रस्तुत की गयी फ़ौजदारी निगरानी संख्या-05/2026 निरस्त की जाती हैं एवं विचरण न्यायालय द्वारा पारित किया गया आदेश दिनांकित 12/12/2025 पुष्ट किया जाता हैं।








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