सनबीम भगवानपुर में गूँजी ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत की स्वर-लहरियाँ
भगवानपुर, 26 अक्टूबर 2026। सनबीम इंग्लिश स्कूल, भगवानपुर में सोमवार को ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराने के उद्देश्य से गोटीपुआ ओडिसी नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति आयोजित की गई। ओडिशा के रघुराजपुर से आए दसभुजा गोटीपुआ ओडिसी नृत्य परिषद के कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट नृत्यकला, भावपूर्ण मुद्राओं, लयबद्ध पदसंचालन और आकर्षक कलाबाजियों से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के दौरान गोटीपुआ नृत्य की ऐतिहासिक परंपरा, भगवान जगन्नाथ की भक्ति से उसके गहरे जुड़ाव तथा ओडिसी शास्त्रीय नृत्य के विकास में उसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया। पद्मश्री गुरु मगुनी चरण दास की समृद्ध कलात्मक विरासत को आगे बढ़ाने वाली इस संस्था के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय नृत्य परंपरा की विशिष्टता, साधना और आध्यात्मिक भावधारा का सजीव परिचय दिया।
दल का नेतृत्व ग्रुप लीडर एवं मर्दल वादक श्री बटाकृष्ण दास ने किया। उनके साथ गायक श्री भगवान बेहरा, बाँसुरी वादक श्री कबीराज प्रधान, मंजीरा वादक श्री नीलकंठ नायक तथा अन्य प्रतिभाशाली नर्तकों ने अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। पारंपरिक संगीत, सधे हुए पदसंचालन, संतुलन और चपलता से परिपूर्ण नृत्य ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर विद्यालय के उपप्रधानाचार्य श्री रविकांत मिश्रा, हेडमिस्ट्रेस सुश्री सुपर्णा तनेजा एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने कलाकारों का स्वागत एवं सम्मान किया। प्रस्तुति के उपरांत आयोजित संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने कलाकारों से गोटीपुआ नृत्य की परंपरा, पारंपरिक वेशभूषा, वाद्ययंत्रों और इस कला में दक्षता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कठोर साधना से संबंधित प्रश्न पूछे। कलाकारों के साथ इस प्रत्यक्ष संवाद ने विद्यार्थियों को भारतीय कला एवं संस्कृति के विविध आयामों को समझने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या सुश्री मौसुमी भट्टाचार्य ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कलाकारों, अतिथियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा भारतीय कला और विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में महत्त्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता, सम्मान और जिज्ञासा को प्रोत्साहित किया। इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से परे भारत की विविध कलात्मक परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक विविधता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक होती हैं। ओडिशा की समृद्ध नृत्य परंपरा की इस मनोहारी प्रस्तुति ने विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और अविस्मरणीय अनुभव प्रस्तुत किया।








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