आईआईटी बीएचयू में श्री मुत्तुस्वामी दीक्षितर के सम्मान में 250 रुपये के स्मारक सिक्के का लोकार्पण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया लोकार्पण, ‘अमर गुरुगुहम् पोट्रुवाम्’ पुस्तक का भी हुआ विमोचन; कर्नाटक संगीत की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

वाराणसी, 3 नवंबर। भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेषकर कर्नाटक संगीत की महान परंपरा को समृद्ध करने वाले महान संगीतज्ञ एवं वाग्गेयकार तथा कर्नाटक संगीत की त्रिमूर्ति में से एक श्री मुत्तुस्वामी दीक्षितर की 250वीं जयंती के उपलक्ष्य में मंगलवार को आईआईटी बीएचयू में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार की ओर से उनके सम्मान में 250 रुपये के स्मारक सिक्के का लोकार्पण किया गया। स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने सिक्के का लोकार्पण किया। उन्होंने श्री मुत्तुस्वामी दीक्षितर के जीवन, दर्शन और संगीत साधना पर आधारित पुस्तक ‘अमर गुरुगुहम् पोट्रुवाम्’ का भी विमोचन किया।
आईआईटी बीएचयू के भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमती निर्मला सीतारमण ने विशेष रूप से उपस्थित स्कूली बच्चों की सराहना की। उन्होंने बच्चों को कर्नाटक संगीत की समृद्ध परंपरा और श्री मुत्तुस्वामी दीक्षितर के अतुलनीय योगदान से अभिमुख कराया। उन्होंने दीक्षितर की वीणा की विशिष्टताओं तथा काशी से उनके गहरे जुड़ाव और यहां उनके निवास के बारे में भी जानकारी दी। वित्त मंत्री ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए आईआईटी बीएचयू की सराहना करते हुए महान संगीतज्ञ के सम्मान में भारत सरकार की ओर से स्मारक सिक्के के लोकार्पण पर प्रसन्नता व्यक्त की।
कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया और इस ऐतिहासिक अवसर के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने श्री मुत्तुस्वामी दीक्षितर के संगीत योगदान और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा में उनके विशिष्ट स्थान पर प्रकाश डाला।
समारोह में कर्नाटक संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां भी हुईं। प्रख्यात गायिका डॉ. सुमित्रा वासुदेव ने अपनी सुमधुर गायन प्रस्तुति से महान संगीतज्ञ को स्वरांजलि अर्पित की। इसके बाद श्री रमणा बालचंद्रन् ने वीणा वादन की प्रस्तुति दी। उनके साथ श्री गणपतिरामन् ने मृदंगम और श्री एल. रामकृष्णन् ने वायलिन पर संगत की। इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को कर्नाटक संगीत की समृद्ध विरासत से अभिमुख कराया।
इस स्मारक सिक्के के लोकार्पण की पहल को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत सहयोग प्राप्त हुआ। इस महत्वपूर्ण पहल को साकार करने में बीएसई के प्रबंध निदेशक श्री सुंदररामन् राममूर्ति का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम के अंत में आईआईटी बीएचयू के भारतीय ज्ञान परंपरा उत्कृष्टता केंद्र के समन्वयक डॉ. वी. रामनाथन् ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके पश्चात वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।








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