बेजुबान,बेसहारा गोवंशों को योगी सरकार दे रही आश्रय,चारा ,चिकित्सा और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था
वाराणसी के 35 गोवंश आश्रय स्थलों में 5 हज़ार से अधिक गौ माताओं को मिला आश्रय
काशी की तीन गौशालाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप, मिल चुका है आईएसओ 9001:2015 प्रमाण पत्र
गोवंशों के लिए चारा, पानी, स्वच्छता और चिकित्सकीय सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था,24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से की जाती है निगरानी
गर्मी और ठंड के दिनों में गोवंशों के बचाव के लिए रहती है विशेष व्यवस्था

वाराणसी,10 मार्च
योगी सरकार बेजुबान,बेसहारा गोवंशों को संरक्षण और देखभाल का पूरा इंतज़ाम की है। वाराणसी के 35 गोवंश आश्रय स्थलों में 5 हज़ार से अधिक गोवंशों को आश्रय मिल रहा है। इनमें तीन गौशालाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है ,जिनको आईएसओ 9001:2015 प्रमाण पत्र प्राप्त हो चूका हैं। छुट्टा पशु दूसरे के खेतों में जाकर फसलों को नुकसान न पहुंचाए और गोवंश सड़क पर दुर्घटना में घायल न हो, इसके लिए संवेदनशील योगी सरकार पूरा ख्याल रख रही है। सड़कों पर लावारिश घूमने वाले गोवंश को सरकार ने सुरक्षित व व्यवस्थित घर दे दिया है, साथ ही उनके चारे,चिकित्सा और स्वास्थ्य का भी ध्यान रख रही है।
मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में 30 गोवंश आश्रय स्थल है। इनमे से 27 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल तथा 3 वृहद स्थाई गोवंश आश्रय स्थल शामिल हैं। इन आश्रय स्थलों में 3223 गोवंशों की देखभाल की जा रही है। यहां पशुओं के लिए चारे, पानी, स्वच्छता और चिकित्सकों की टीम के साथ चिकित्सकीय सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था की गई है। साथ ही सुरक्षा के लिए 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी भी की जाती है। इसके अलावा एक वृहद गौशाला का निर्माण कार्य भी जारी है, जिससे आने वाले समय में और अधिक गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिल सकेगा। वाराणसी नगर निगम द्वारा भी 5 गौ आश्रय स्थलों का संचालन किया जा रहा है। जिसमे 1797 गोवंशों की देखभाल की जा रही है।
वाराणसी की तीन गौशालाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाली
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आलोक सिंह ने बताया कि काशी की तीन गौशालाएं मधुमखिया, बंदेपुर और भिटकुरी,अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरते हुए आईएसओ 9001:2015 प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुकी हैं। यह प्रमाणपत्र पशुओं की देखभाल, पोषण, स्वच्छता और समग्र प्रबंधन की उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए दिया जाता है।
गर्मी और ठंड से बचाव की विशेष व्यवस्था
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि गोवंशों को ठंड के दिनों में अलाव जलाने के साथ ही ,काऊ कोट ,तिरपाल ,आदि की व्यवस्था की जाती है, वही गौ माताओं को प्रचंड गर्मी में लू और गर्मी से बचाने के लिए कूलर, पंखा, तिरपाल ,पानी आदि की विशेष व्यवस्था रखी जाती है। चिकित्सकों की टीम लगातार इनकी निगरानी करती रहती है।








Users Today : 3
Users Yesterday : 61