पुलिस स्मृति दिवस-2026 के अवसर पर वीर अमर शहीदों के सम्मान में लखनऊ में आयोजित स्मृति परेड कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया नमन
याद करिये,एक दौर वह भी था, जब पुलिस का एक थानेदार या एसपी भी किसी अपराधी पर हाथ डालने से पहले सोचता था!
क्योंकि, अपराधी को छूते ही,सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे,अगले ही कुछ घण्टो में अपराधी की बजाय अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो जाती थी!
पुलिस अपराधियों को पकड़ने के पहले हुक्मरानों के पालतू पशुओं को खोजने के लिए जंगलों में दौड़ने पर विवश थी!

थानों में सीलन भरी बैरके थीं,तपती खपरैल छतें थीं,और पीएसी कम्पनियों को ताला लगाकर बंद करने का षड्यंत्र भी सत्ता के गलियारों में रचा जा रहा था,अपराधी पुलिस की खुली जीप में बैठकर खुल्लमखुल्ला ऑटोमेटिक हथियार लहराते थे,और हमारे बहादुर जवान जंग लगी रायफल लेकर अपनी जान बचाने के लिए भागे भागे फिरते थे!
अपराधियों का ऐसा सामानांतर राज था कि, कानून केवल तमाशबीन बनकर रह गया था।
जो लोग पुलिस कार्रवाई, एनकाउंटर पर,ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़ा करते हैं,ये वही लोग हैं जो दुर्दांत माफिया,आतंकियों की मौत पर छाती पीटते हैं,उनकी कब्रों पर जाकर मातम मनाते हैं।

जब इन्ही माफियाओं के गोलियों से हमारा कोई निर्दोष जवान शहीद होता है तो ये सभी लोग,उन अनाथ बच्चों के आंसू पोछने के लिए इनके पास संवेदना नही होती है!








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