हिंदुओं के मन में शौर्य की भावना को पुनः जागृत करने हेतु हिंदू जनजागृति समिति की ओर से विजयादशमी (दशहरा) के अवसर पर देशभर में 150 से अधिक स्थानों पर ‘सामूहिक शस्त्रपूजन’!
वाराणसी- विजयादशमी का दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी, तो प्रभु श्रीरामचंद्र ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। इसी दिन पांडवों ने अपना अज्ञातवास समाप्त कर पुनः शस्त्र धारण किए थे। इसी उद्देश्य से हिंदुओं के मन में शौर्य की भावना को पुनः जागृत करने हेतु हिंदू जनजागृति समिति की ओर से देशभर में 150 से अधिक स्थानों पर
‘सामूहिक शस्त्रपूजन’ का आयोजन किया गया।
वाराणसी, गाजीपुर तथा लखनऊ जिले में यह पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर गुजराती समाज अध्यक्ष अनिल भाई शास्त्री, वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, मारवाड़ी युवा संघ के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम जालान, अखिल भारतीय न्यास समिति महामंत्री राजेश सेठ, रामकटोरा राम जानकी सेवा समिति महामंत्री राजन राय, चौरसिया व्यापार मंडल महामंत्री सुजीत चौरसिया, डॉ अजय जायसवाल, सोनराज सिंह, श्रीमती सुनीता विश्वकर्मा और समिति के राजन केशरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर वक्ताओ ने बताए अनेक क्रांतिकारीयो और राष्ट्रपुरुषों ने शौर्य एवं पराक्रम दिखाकर अपने राष्ट्र और धर्म की रक्षा की है। इसलिए शौर्य भारतीयों में जन्मजात ही है। हमारे देवता भी हमें शौर्य का संदेश देते हैं। इसलिए हमें अपने इतिहास का स्मरण हमेशा रखना चाहिए ।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम शस्त्रपूजन के उद्देश्य एवं महत्त्व की जानकारी दी गई। इसके उपरांत शस्त्रपूजन विधि संपन्न की गई तथा माँ दुर्गा की आरती की गई। ‘श्री दुर्गादेव्यै नमः’ इस सामूहिक नामजप के उपरांत ‘हिंदू राष्ट्र की प्रतिज्ञा’ ली गई। इस अवसर पर माँ दुर्गा के चरणों में प्रार्थना की गई, ‘‘इस शस्त्रपूजन के माध्यम से हम सभी के भीतर शौर्य जागृत हो तथा हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए समर्पित होने की प्रेरणा प्राप्त हो।’’

वाराणसी- विजयादशमी का दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी, तो प्रभु श्रीरामचंद्र ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। इसी दिन पांडवों ने अपना अज्ञातवास समाप्त कर पुनः शस्त्र धारण किए थे। इसी उद्देश्य से हिंदुओं के मन में शौर्य की भावना को पुनः जागृत करने हेतु हिंदू जनजागृति समिति की ओर से देशभर में 150 से अधिक स्थानों पर
‘सामूहिक शस्त्रपूजन’ का आयोजन किया गया।
वाराणसी, गाजीपुर तथा लखनऊ जिले में यह पूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर गुजराती समाज अध्यक्ष अनिल भाई शास्त्री, वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, मारवाड़ी युवा संघ के पूर्व अध्यक्ष पुरुषोत्तम जालान, अखिल भारतीय न्यास समिति महामंत्री राजेश सेठ, रामकटोरा राम जानकी सेवा समिति महामंत्री राजन राय, चौरसिया व्यापार मंडल महामंत्री सुजीत चौरसिया, डॉ अजय जायसवाल, सोनराज सिंह, श्रीमती सुनीता विश्वकर्मा और समिति के राजन केशरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर वक्ताओ ने बताए अनेक क्रांतिकारीयो और राष्ट्रपुरुषों ने शौर्य एवं पराक्रम दिखाकर अपने राष्ट्र और धर्म की रक्षा की है। इसलिए शौर्य भारतीयों में जन्मजात ही है। हमारे देवता भी हमें शौर्य का संदेश देते हैं। इसलिए हमें अपने इतिहास का स्मरण हमेशा रखना चाहिए ।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम शस्त्रपूजन के उद्देश्य एवं महत्त्व की जानकारी दी गई। इसके उपरांत शस्त्रपूजन विधि संपन्न की गई तथा माँ दुर्गा की आरती की गई। ‘श्री दुर्गादेव्यै नमः’ इस सामूहिक नामजप के उपरांत ‘हिंदू राष्ट्र की प्रतिज्ञा’ ली गई। इस अवसर पर माँ दुर्गा के चरणों में प्रार्थना की गई, ‘‘इस शस्त्रपूजन के माध्यम से हम सभी के भीतर शौर्य जागृत हो तथा हिंदू राष्ट्र की स्थापना के लिए समर्पित होने की प्रेरणा प्राप्त हो।’’







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