प्रयागराज में तमिल प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत और आस्था से भरा दिव्य अनुभव
प्रयागराज, 8 दिसम्बर — काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत तीसरा प्रतिनिधिमंडल, कुल 216 प्रतिनिधियों के साथ, आज काशी से प्रयागराज पहुंचा। प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत एमएलसी श्री सुरेन्द्र चौधरी, महापौर श्री गणेश केशरवानी, सिटी मजिस्ट्रेट श्री विनोद कुमार सिंह तथा एनसीजेडसीसी के निदेशक श्री सुदेशन द्वारा किया गया। अतिथियों का तिलक, पुष्प-वर्षा और सम्मान स्वरूप यथार्थ गीता के तमिल संस्करण भेंट कर अभिनंदन किया गया।

एमएलसी श्री सुरेन्द्र चौधरी ने सभी तमिल प्रतिनिधियों का हृदय से स्वागत करते हुए कुंभ मेले के विश्व रिकॉर्ड, भारत की सांस्कृतिक शक्ति और काशी तमिल संगमम् द्वारा हो रहे अंतर-सांस्कृतिक संवाद की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से भारत एक नई सांस्कृतिक एकता के युग में प्रवेश कर रहा है।

महापौर श्री गणेश केशरवानी ने उत्साहपूर्वक प्रतिनिधियों का स्वागत किया और पत्रकारों व लेखकों की सामाजिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने तमिल और उत्तर भारतीय साहित्य परंपराओं की समानताओं पर विचार रखते हुए कहा कि भाषा या जाति के आधार पर भेदभाव से ऊपर उठकर देश को एक नई दिशा देनी चाहिए। उन्होंने शिवालिक पार्क के प्रवेशद्वार का भी उल्लेख किया और सबको भेदभाव के विरुद्ध आगे आने का आह्वान किया।
औपचारिक स्वागत के बाद प्रतिनिधिमंडल ने पवित्र संगम में पुण्य स्नान किया और तत्पश्चात बड़े हनुमान (लेटे हुए हनुमान जी) के दर्शन किए। इस आध्यात्मिक यात्रा ने कई प्रतिनिधियों को अत्यंत भावुक कर दिया।
प्रतिनिधियों ने प्रयागराज में मिले प्रेम, आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौन्दर्य को अविस्मरणीय बताया।
प्रवीण कुमार ने कहा कि जिस सम्मान और स्नेह से हमारा स्वागत किया गया, वह हमेशा स्मरण रहेगा। संगम स्नान मेरे जीवन का सबसे पवित्र अनुभव था। मैं प्रयागराज प्रशासन और काशी तमिल संगमम् का दिल से धन्यवाद करता हूं।
दक्षिण तमिलनाडु से आए महेंद्र ने कहा कि हम बहुत सौभाग्यशाली हैं कि हमें संगम स्नान और बड़े हनुमान जी के दर्शन जैसे दिव्य अवसर प्राप्त हुए। यह अनुभव अनमोल है। मैं काशी तमिल संगमम् का आभारी हूँ कि हमें ऐसी सांस्कृतिक यात्रा का हिस्सा बनने का अवसर मिला।
इसी प्रकार हरिश्वेता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ कि संगम स्नान और दर्शन के साथ-साथ मुझे साइबेरियन पक्षियों को इतने करीब से देखने का अवसर मिला। यह क्षण मेरे लिए जीवनभर याद रहने वाला है। प्रयागराज की हवा में एक अनोखी आस्था और सौंदर्य है।
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिनिधियों में भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला—कई प्रतिनिधि आँसू पोंछते नजर आए, कुछ अपने परिवारों से वीडियो कॉल कर इस आध्यात्मिक अनुभव को साझा कर रहे थे। सबने स्वयं को अत्यंत सम्मानित, गौरवान्वित और काशी तमिल संगमम् का हिस्सा बनने पर धन्य महसूस किया।








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