ब्रिक्स की सफलता पर काशी में वैदिक मंत्रों के बीच बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आभार
नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने पर नमामि गंगे ने किया आयोजन, वैश्विक शांति की कामना
वाराणसी। भारत की अध्यक्षता में संपन्न 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता और नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने पर सोमवार को काशी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आभार जताया गया। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सिद्धेश्वरी स्थित आध्यात्मिक परिसर में नमामि गंगे की ओर से आयोजित कार्यक्रम में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के वेदपाठी बटुकों ने स्वस्तिवाचन, द्वादश ज्योतिर्लिंग और गंगाष्टकम का पाठ किया। इस दौरान ब्रिक्स देशों के राष्ट्रध्वज और उनके राष्ट्राध्यक्षों की तस्वीरों के साथ वैश्विक शांति एवं समृद्धि की कामना की गई।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में भारत ने ब्रिक्स सम्मेलन के माध्यम से दुनिया के सामने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को मजबूती से रखा है। सम्मेलन के उद्घाटन और समापन के दौरान भारतीय संस्कृति, परंपरा और प्राचीन ज्ञान को जिस तरह वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया, वह भारत की सांस्कृतिक शक्ति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और विभिन्न देशों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से साझा हितों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया है। भारत ने ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने के साथ ही विश्व शांति और सहयोग के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
राजेश शुक्ला ने कहा कि व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत और चीन का साझा हितों के मुद्दों पर साथ आना दोनों देशों के संबंधों में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। इससे द्विपक्षीय संबंधों को और गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहा।
कार्यक्रम के दौरान वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रों का पाठ कर सम्मेलन की सफलता के लिए बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। आयोजकों ने कहा कि काशी की आध्यात्मिक परंपरा के माध्यम से विश्व में शांति, सद्भाव और सहयोग का संदेश देना भारतीय संस्कृति की मूल भावना है।








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