वाराणसी कचहरी के विस्तार की ठोस मांग, सेंट्रल जेल की 40 एकड़ भूमि के उपयोग का प्रस्ताव
वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने मुख्य न्यायाधीश व जिला जज को लिखा पत्र, न्यायिक अधोसंरचना पर उठाया गंभीर सवाल
वाराणसी।
पूर्वांचल की न्यायिक राजधानी कही जाने वाली वाराणसी (बनारस) कचहरी के आवश्यक एवं बहुप्रतीक्षित विस्तार को लेकर एक महत्वपूर्ण, दूरदर्शी और जनहितकारी पहल सामने आई है। वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, जो वर्तमान में बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं, ने इस संबंध में माननीय Allahabad High Court के माननीय मुख्य न्यायाधीश तथा माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वाराणसी को एक विस्तृत पत्र प्रेषित किया है।

गौरतलब है कि शशांक शेखर त्रिपाठी न केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, बल्कि वे पूर्व में सेंट्रल बार एसोसिएशन तथा बनारस बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। साथ ही, वे भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। न्यायिक, विधिक एवं संगठनात्मक अनुभव के आधार पर उठाई गई यह मांग विधिक जगत में विशेष महत्व रखती है।
अपने पत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी ने उल्लेख किया है कि वाराणसी कचहरी केवल एक न्यायालय परिसर नहीं, बल्कि पूर्वांचल की न्यायिक चेतना, विधिक परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त केंद्र है। प्रतिदिन हजारों वादकारियों, अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही के बीच वर्तमान कचहरी परिसर की भौतिक संरचना अब न्यायिक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गई है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से इंगित किया कि कचहरी परिसर में अधिवक्ता चैंबरों की भारी कमी, न्यायालय कक्षों का संकुचित स्वरूप, पार्किंग की अव्यवस्था, आधुनिक बार लाइब्रेरी, रिकॉर्ड रूम तथा महिला अधिवक्ताओं एवं नवागत अधिवक्ताओं के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का अभाव न्यायिक गरिमा और विधि व्यवसाय की मर्यादा को प्रभावित कर रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी ने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि वादों की निरंतर बढ़ती संख्या, ई-कोर्ट जैसी आधुनिक व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्यायिक कार्यों के विस्तार को देखते हुए अब वाराणसी कचहरी के सुनियोजित, आधुनिक और भव्य विस्तार की नितांत आवश्यकता है।

इसी क्रम में उन्होंने एक ठोस एवं व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से संभव हो, तो सेंट्रल जेल, वाराणसी परिसर की लगभग 35 से 40 एकड़ भूमि को न्यायालय परिसर के विस्तार हेतु अधिग्रहित अथवा उपयोग में लाया जा सकता है। इस भूमि पर बहुमंजिला न्यायालय भवन, अधिवक्ता चैंबर कॉम्प्लेक्स, आधुनिक बार लाइब्रेरी, ई-कोर्ट सुविधाएँ, महिला अधिवक्ताओं एवं नवागत अधिवक्ताओं के लिए विशेष केंद्र, साथ ही पर्याप्त पार्किंग एवं जनसुविधाओं का विकास किया जा सकता है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि इस प्रकार का विस्तार न केवल न्यायिक कार्यों को अधिक सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध बनाएगा, बल्कि बनारस कचहरी की ऐतिहासिक पहचान, भव्यता और विधि व्यवसाय की प्रतिष्ठा को भी राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ करेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने माननीय न्यायालयों से जनहित, न्यायिक आवश्यकता और भविष्य की दृष्टि से इस प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए संबंधित प्रशासनिक एवं शासकीय स्तर पर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है, जिससे वाराणसी कचहरी के विस्तार की दिशा में शीघ्र ठोस पहल संभव हो सके।
कानूनी जगत से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह पहल केवल अधिवक्ता समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि आम वादकारियों, न्यायिक अधिकारियों और समग्र न्याय व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकती है।








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