श्री सुभाष राय को प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान
कबीर विवेक परिवार द्वारा दिया जाने वाला प्रो. शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान इस वर्ष सुप्रसिद्ध अध्येता, समादृत कवि एवं संपादक श्री सुभाष राय को प्रदान किया जाएगा. हिंदी के लब्धप्रतिष्ठित कथाकार प्रो.काशीनाथ सिंह, सुप्रसिद्ध कवि-आलोचक श्री अशोक वाजपेयी, सुपरिचित कवि-आलोचक प्रो.आशीष त्रिपाठी की निर्णायक समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है। सम्मान की सूचना कबीर विवेक परिवार की प्रमुख डॉ. भगवंती सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि यह सम्मान प्राचीन एवं मध्यकालीन साहित्य के अध्ययन में विशेष योगदान के लिए दिया जाने वाला यह सम्मान सुभाष राय को विश्व
विख्यात भक्तिन कवयत्रियों पर केंद्रित पुस्तकों ‘दिगम्बर विद्रोहिणी अक्क महादेवी’ और ‘आत्मसंभवा आंडाल’ के लिए प्रदान किया जाएगा। ये दोनों
पुस्तकें रज़ा न्यास की अध्येतावृत्ति पर लिखी और सेतु प्रकाशन दिल्ली
द्वारा प्रकाशित की गई हैं। निर्णायकों ने अपनी संस्तुति में कहा कि आन्डाल और अक्क महादेवी भारतीय कविता में भक्ति के कारण आए जनतांत्रीकरण की प्रक्रिया से उपजी थीं। सुभाष राय ने कि इन दोनों पुस्तकों में दोनों महान पुरखिनों के आंतरिक संसार और सामाजिक-साँस्कृतिक प्रतिरोध को
गहरायी से रेखांकित किया है। शुकदेव सिंह स्मृति सम्मान के संयोजक हिंदी विभाग बी. एच. यू. के प्रो. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि संत सहित्य के विशेषज्ञ प्रोफेसर शुकदेव सिंह की स्मृति में हर वर्ष दिया जाने वाला यह सम्मान विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी उनकी जन्मतिथि 24 जुलाई को
समारोहपूर्वक वाराणसी में प्रदान किया जायेगा। गाजीपुर में जन्मे प्रो शुकदेव सिंह संत साहित्य के अत्यंत प्रतिष्ठित अध्येता और आचार्य थे। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर रहे शुकदेव सिंह ने संत
साहित्य से सम्बन्धित अनेक पुस्तकों का लेखन और संपादन किया। उनका यह काम
संत साहित्य के शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए स्थायी महत्व रखता है।

इस वर्ष के सम्मानित लेखक श्री सुभाष राय मूलतः उत्तर प्रदेश के बड़ागांव (मऊ) में जन्मे। प्रारंभिक पढ़ाई-लिखाई गांव की पाठशाला में पूर्ण की। आगरा विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध साहित्य संस्थान के.एम.आई. से हिंदी भाषा और साहित्य में स्रातकोत्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
वहीं से विधि की पढ़ाई पूरी की और उत्तर भारत के विख्यात संत कवि दादूदयाल
के रचना संसार पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। दशकों तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे।कई प्रतिष्ठित दैनिक समाचारपत्रों में शीर्ष जिम्मेदारियां संभालने के बाद इस समय लखनऊ में जनसंदेश टाइम्स के प्रधान संपादक के रूप में कार्यरत हैं।श्री सुभाष राय के अब तक दो कविता संग्रह ‘सलीब पर सच’ और ‘मूर्तियों के जंगल में’, एक निबंध संग्रह ‘जाग मछन्दर जाग’ और संस्मरण एवं आलोचनात्मक लेखों का एक संग्रह ‘अंधेरे के पार’ प्रकाशित हैं। रजा न्यास की परियोजना के तहत सेतु प्रकाशन से ‘दिगम्बर विद्रोहिणी अक्क महादेवी’ और ‘आत्मसंभवा आंडाल’ का प्रकाशन हिंदी जगत में अत्यंत सराहनापूर्वक स्वीकार किया गया।उन्हें नयी धारा रचना सम्मान, माटी रतन सम्मान एवं देवेन्द्र कुमार बंगाली स्मृति कविता सम्मान और स्पंदन
कृति आलोचना सम्मान से नवाजा जा चुका








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