किसान अधिकार सभा में वाराणसी के विविध योजनाओं के प्रभावित किसानों ने भूमि अर्जन पुनर्वास कानून 2013 के उल्लंघन के खिलाफ व्यक्त किया आक्रोश
शास्त्रीघाट पर एकजुट होकर बृहद आन्दोलन का किसानों ने किया ऐलान,एडीएम सिटी को सौपा ज्ञापन

वाराणसी। बनारस के किसानों एवं कामगारों की जमीन, जमीर, रोजगार एवं बनारसीयत की रक्षा को लेकर गुरुवार को सुबह 11 बजे शास्त्रीघाट वरुणापुल कचहरी पर किसान अधिकार सभा का आयोजन किसान नेता विनय शंकर राय मुन्ना की अध्यक्षता में किसान संघर्ष समिति के तत्वावधान में हुआ। सभा में ट्रांसपोर्ट नगर, काशी द्वार, स्पोर्ट्स सिटी, वर्ल्ड सिटी एक्सपो, मेडिसिटी, विद्या निकेतन सिटी, वैदिक सिटी, रिंग रोड, डोमरी शहरी वन योजना, गंगा एवं वरुणा एलिवेटेड रोड, रामनगर मल्टीमॉडल टर्मिनल, जीटी रोड आवासीय योजना, बाबतपुर एयरपोर्ट विस्तारीकरण, रुद्र काशी टाउनशिप मढनी, आनंद काशी टाउनशिप कल्लीपुर, वरुणा विहार के किसान प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य अतिथि अविनाश काकड़े ने कहा कि बनारस के मूल वासियों को उजाड़कर अपने पूंजीपति मित्रों को काशी में बसाने की गहरी साजिश रच रहा है गुजराती गैंग, जिसके खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का मन बनारस के किसान ने बना लिया है। सभा में सर्वसम्मति से तय हुआ कि भूमि अर्जन पुनर्वासन कानून 2013 के अनुपालन, किसानों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा और बनारस की विरासत को बचाने हेतु 15 दिन के अल्टीमेटम के साथ एडीएम सिटी को ज्ञापन दिया गया और तय हुआ कि अगर सरकार बनारस के किसानों के साथ बैठक कर भूमि अर्जन पुनर्वास कानून पालन करने की घोषणा नहीं करती है तो 15 दिन बाद बनारस में बृहद किसान आन्दोलन होगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। किसान नेता विनय शंकर राय मुन्ना ने कहा कि किसानों की जमीन लूटकर काशी में आवासीय बहुमंजिली इमारत बेचकर मोक्ष का व्यापार कर रही है भाजपा सरकार। सरदार सेना रोहनिया विधानसभा प्रभारी राजेश भाई पटेल ने कहा कि सरकार के दमनकारी एवं अवैधानिक कृत्यों के खिलाफ किसान और कामगार एकजुट होकर निर्णायक आंदोलन करेगा तथा बनारस की जमीन, रोजगार और बनारसीयत को बचाने के लिए कानून के तहत मिले अधिकारों का पालन कराना ही इस सभा का मुख्य उद्देश्य है। सभा में मुख्य रूप से राजेश भाई पटेल, शशि प्रताप सिंह, शमीम नोमानी, प्रजानाथ शर्मा, रामधीरज, अशोक पटेल, नित्यानंद राय, सुनील सिंह, अमलेश पटेल, विजय नारायण वर्मा, संतोष पटेल, उदय पटेल, रमेश पटेल, प्रेम शाह, मेवा पटेल, दिनेश तिवारी, धनंजय त्रिपाठी, रामजन्म, मनीष शर्मा, राहुल, विजयशंकर, रामनरायन, रमेश, नीरज, संदीप, रवि, प्रेम, सुनील, उर्मिला, जगरानी, राधिका, सुनीता, चमेली आदि सैकड़ों किसान शामिल रहे।








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