जानिए कौन है वाराणसी प्रकरण में असल गुनहगार
यह खबर इस समय पूरे यूपी में सुर्खियां बनी है कि वाराणसी में पुलिस और अधिवक्ताओं के बीच में विवाद चल रहा है.. कोई पुलिस को दोष दे रहा है तो कोई वकीलों को!
लेकिन यह दोषारोपण करने से पहले हमको यह समझना होगा कि आखिरकार इस विवाद कि असल जड़ क्या है?इस पूरे मामले में असल गुनहगार कौन है?
तो चलिए पहले आपको पूरा मामला समझाते हैं,इस मामले की शुरुआत वाराणसी के थाना बड़ागाँव से होती है.. यहाँ दो पक्ष आपसी घरेलू विवाद को लेकर थाना बड़ागांव पहुंचते है.. स्थानीय पुलिस विवाद स्वरूप झगड़े की स्थिति को देखकर दोनों पक्षों का 151 में चालान कर देती है,बस यही बात वकील मोहित को नागवार गुजरती है…और फिर होता वह है जो पूरी यूपी में सुर्खियां बना है, थाने के दारोगा मिथिलेश प्रजापति सरकारी काम से न्यायालय जा पहुंचते हैं,वहां पहले से घात लगाए अधिवक्ता उन पर टूट पड़ते हैं…मामले का वीडियो सामने आता है तो लोगों के पैरों तले से जमीन खिसक जाती है,लोग यह विचार कर घबराने लगते हैं कि जो वकील पुलिस के साथ इस तरह से जानलेवा मारपीट कर सकते हैं वह उनके साथ क्या करेंगे?पूरा मामला बार एसोसिएशन के पास पहुंचता है,वह इस पूरे मामले में पुलिस का सहयोग करने की बात करते हैं..और जिन लोगों ने पुलिस पर गंभीर रूप से मारपीट करने की हिमाकत की,उन पर बार एसोसिएशन के पदाधिकारी ने कार्रवाई के मामले पर पुलिस का सहयोग करने की बात भी कहते हैं,यानी यहां तक इतना स्पष्ट है की बार के पदाधिकारी को पता था कि उनके चंद वकीलों ने गलत कर दिया है,आखिरकार तीन दिन बीत गए लेकिन जिन 10 नामदर्ज समेत 50 से 60 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था,उनकी गिरफ्तारी नहीं होती है..आखिरकार गंभीर रूप से घायल दरोगा मिथिलेश प्रजापति के परिजन वाराणसी कमिश्नर मोहित अग्रवाल के पास पहुंचते..यहां फिर से कहानी उलझ जाती..इस बार फिर से पुलिस और वकीलों में हॉट टॉक हो गई …एक वकील ने महिला पुलिस अधिकारियों को अपशब्द भी कहे,लेकिन पुलिस ने वकीलों की तरह कानून हाथ में नहीं लिया…कर्तव्य निभाने के दौरान अपने एक घायल साथी को देखकर भी पुलिस कर्मियों ने अपना धैर्य नहीं खोया…उन्होंने वकीलों से मारपीट नहीं की…अब वकील धरना दे रहे हैं और पुलिस प्रशासन से कह रहे हैं “होश में आओ”
कानून के जानकारों को बताना चाहिए कि अपने एक साथी को गंभीर रूप से घायल देखकर भी पुलिस यदि मौन है,दो पक्षों का विवाद होने पर दोनों पक्षों का चालान किया गया…तो यह बात विचार करने योग्य है कि आखिरकार कौन होश में और कौन बेहोश?जवाब आप दीजिए,अपनी आत्मा को टटोलकर!
अगर इसी मामले में पुलिस 1 पक्ष का चालान करती तो पुलिस पर आरोप लगाते की पुलिस ने एक पक्षीय कार्रवाई की, लेकिन जब पुलिस ने निष्पक्षता दिखाते हुए दोनों पक्षों पर कार्रवाई की तो पुलिस को बदले में मिला अपना एक घायल साथी और पुलिस प्रशासन होश में आओं का नारा, आप ही बताए तो पुलिस क्या करें?
[7:17 pm, 20/9/2025] Shasha Tripathi Adv. New: प्रस्ताव
सेंट्रल बार एसोसिएशन, वाराणसी एवं बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष/महामंत्रीगण के नाम
विषय: वाराणसी कचहरी में अधिवक्ता-पुलिस विवाद की स्वतंत्र जांच एवं अधिवक्ताओं की सुरक्षा हेतु पुलिस को सूचना प्रेषित करने के संबंध में
आदरणीय अध्यक्ष एवं महामंत्रीगण,
जैसा कि कल वाराणसी कचहरी परिसर में पुलिस व अधिवक्ताओं के बीच गंभीर मारपीट की घटना घटित हुई, जिससे अधिवक्ता समाज में गहरा रोष व्याप्त है। ऐसी घटनाएं न केवल हमारे पेशे की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि कचहरी परिसरों में कानून व्यवस्था व निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।
यह भी अत्यंत चिंतनीय है कि हाल ही में पुलिस द्वारा न केवल अधिवक्ताओं बल्कि सामान्य जनता के साथ भी लगातार उत्पीड़नात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। आए दिन दमनकारी कार्रवाइयों, अवैध हिरासत, अनावश्यक शक्ति-प्रयोग तथा अनुचित दुव्र्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे समाज में पुलिस व प्रशासन के खिलाफ व्यापक आक्रोश एवं अविश्वास उत्पन्न हो रहा है।
विशेष रूप से यह उल्लेखनीय है कि वाराणसी सिविल कोर्ट में हुई कल की घटना कई पूर्ववर्ती घटनाओं से उपजे आक्रोश का परिणाम थी। यह स्थिति संकेत देती है कि दोनों पक्षों—अधिवक्ता समाज व पुलिस प्रशासन—को अपने-अपने Code of Conductपर आत्मचिंतन करते हुए भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस संदर्भ में मेरा निवेदन है कि सभी बार एसोसिएशन द्वारा एक संयुक्त जांच कमेटी गठित की जाए, जिसमें प्रत्येक एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हों। यह समिति घटना की संपूर्ण जांच कर तथ्यों को उजागर करेगी एवं निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार करेगी।
प्रस्तावित सुझाव:
– जब तक संयुक्त समिति की जांच पूरी न हो, किसी भी अधिवक्ता के खिलाफ पुलिस या प्रशासन द्वारा कोई दमनकारी, उत्पीड़नात्मक अथवा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न की जाए।
– बार संगठन की ओर से पुलिस के उच्च अधिकारियों को लिखित सूचना (पत्र) भेजी जाए कि जांच कमेटी के गठन की प्रक्रिया चल रही है एवं निष्कर्ष आने तक कोई कार्रवाई न की जाए।
– पुलिस प्रशासन बार संगठनों की सहमति के बिना कोई कार्रवाई न करे एवं दोनों पक्षों का सम्मान सुरक्षित रहे।
– जांच में CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शी बयान एवं अन्य प्रमाण जुटाए जाएं व कमेटी को दिए जाएं।
– पुलिस द्वारा अधिवक्ताओं एवं सामान्य जनता के उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं की भी जांच की जाए एवं इसके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की मांग की जाए।
– दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी मर्यादा व आचार संहिता का पालन करें, ताकि न्यायिक परिसरों में शालीन, गरिमामय एवं शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखा जा सके।

यह प्रस्ताव सेंट्रल बार एसोसिएशन बनारस व बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं महामंत्रीगण को संयुक्त रूप से संबोधित है कि अधिवक्ता समाज के अधिकार एवं सुरक्षा हेतु सभी आवश्यक कदम उठाएं, मीडिया एवं प्रशासन तक प्रभावी संदेश पहुंचाएं।
आपसे आग्रह है कि उपरोक्त प्रस्ताव को पारित करते हुए पुलिस को आवश्यक सूचना प्रेषित कर, बार समाज की गरिमा एवं सुरक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।








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