विश्व वैदिकसनातनन्यास द्वारा आयोजित असि नदी पर संगोष्ठी सम्पन्न,
वाराणसी। असि नदी को केवल जल निकासी अथवा नाले के रूप में प्रशासनिक दस्तावेजो में दर्ज कर काशी के साथ बहुत ही अन्याय हुआ है। यह सब लोग जानते हैं कि वरुणा और असि के बीच का क्षेत्र ही काशी कहलाता है। काशी क्षेत्र में ही शरीर त्यागने पर मोक्ष का वर्णन है। विश्व वैदिक सनातन न्यास की मैं सराहना करता हूँ जिसने असि नदी को अविरल बनाने के क्रम इस गोष्ठी का आयोजन किया है तथा संकल्प लिया है कि उसकी अविरलता तक संघर्ष जारी रहेगा। उक्त बातें सौरभ तिवारी अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय नें अपने सम्बोधन में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि न्यायालय के द्वारा आदेश के बाद सम्बंधित विभागों द्वारा सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन तो मिल रहा है लेकिन वह इसको अविरल करने के लिए पूर्ण नहीं है।

कार्यक्रम का प्रारंभ भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर प्रारभ हुआ। अतिथियों का स्वागत एवं विषय स्थापना करते हुए विश्व वैदिक सनातन न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सिंह ने अपना संकल्प पत्र पढ़ा कि असि नदी की अविरलता तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा।
विशिष्ठ अतिथि हीरालाल मिश्र मधुकर ने कहा कि काशी का दुर्भाग्य है जो अपने अस्तित्व को सहजने में असफल रहा। अति विशिष्ट अतिथि साधक दिवाकर जी महाराज ने भी कहा कि असि को अविरल करने के लिए केवल विश्व वैदिक सनातन न्यास को ही नहीं बल्कि पूरे काशी वासी को संकल्प लेकर क्रांति आवाहन करना चाहिए। अध्यक्षीय संबोधन में शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं सामाज के विशिष्ठ आर पी. सिंह ने कहा कि हम लोग मिलकर संकल्प लेते हैं कि असि नदी की अविरलता तक मिलकर कार्य करेंगे। विषय पर गोष्ठी में विशाल दुबे, फारूक खान, अश्विनी त्रिपाठी, डॉ. हंसराज सिंह, रीना सिंह, डॉ सन्तोष सिंह विश्वकर्मा, अभिनव वर्मा, राकेश शर्मा, पंकज सिंह, पूनम यादव ने कहा कि गली – गली, मुहल्ले-मुहल्ले में आंदोल शुरू करना चाहिए।
समी वक्ताओं ने सरकार से आग्रह किया है कि जिस तरह काशी विश्वनाथ का कारिडोर बना क्यों न इसी तरह से असि नदी का कल्याण किया जाए। उसके लिए पूरी काशी को सड़क पर उत्तरना होगा तो भी हम लोग तैयार हैं।
गोष्ठी संचालन डॉ. सुमन राव तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सन्तोष सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व वैदिक सनातन न्यास नें दिया।








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