पिछले कई वर्ष से यूपी एसटीएफ की कमान संभाल रहे एडीजी अमिताभ यश के कुशल नेतृत्व में यूपी एसटीएफ का बदमाशों के विरुद्ध ताबड़तोड़ एक्शन जारी
साभार :- अरशद आलम
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उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई की बात हो तो उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स यानी यूपी एसटीएफ का नाम सबसे प्रमुखता से सामने आता है। अपराध की बदलती प्रकृति, गैंगों के बढ़ते नेटवर्क और इनामी बदमाशों की चुनौती के बीच एसटीएफ ने जिस तरह लगातार ऑपरेशन चलाए हैं, उससे यह संदेश साफ हुआ है कि कानून के शिकंजे से बचना अब आसान नहीं है।
वर्ष 2026 में अब तक हुई विभिन्न मुठभेड़ों में 10 कुख्यात और इनामी अपराधियों का मारा जाना इसी अभियान की तस्वीर पेश करता है। इन 10 अपराधियों पर हत्या, लूट, रंगदारी, डकैती, सुपारी किलिंग और जानलेवा हमले जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े अनेक मुकदमे दर्ज बताए गए थे। इनमें कई अपराधी लंबे समय से फरार थे और अलग-अलग राज्यों में पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे।
एसटीएफ की कार्रवाई का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इन अभियानों में अपराधियों के नेटवर्क, उनकी गतिविधियों और उनके आपराधिक इतिहास की गहन पड़ताल के बाद कार्रवाई की जाती है।
इस वर्ष की शुरुआत ही एक बड़ी कार्रवाई से हुई। 3 फरवरी को वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र में एक लाख रुपये के इनामी बनारसी यादव को मुठभेड़ में मार गिराया गया। गाजीपुर निवासी इस हिस्ट्रीशीटर पर दो दर्जन से अधिक मुकदमे बताए गए थे। वह वाराणसी के सारनाथ में चर्चित कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के मामले में वांछित था। इस कार्रवाई ने पूर्वांचल में सक्रिय आपराधिक गिरोहों को स्पष्ट संदेश दिया।
27 फरवरी को आगरा में एसटीएफ नोएडा और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 50 हजार रुपये का इनामी पवन उर्फ कल्लू मारा गया। उसे रणदीप भाटी और अमित कसाना गैंग का सक्रिय शूटर बताया गया था। दिल्ली-एनसीआर में हत्या और रंगदारी की घटनाओं से जुड़े इस अपराधी के खिलाफ कार्रवाई ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के अपराध नेटवर्क पर पुलिस की पकड़ को रेखांकित किया।
1 अप्रैल को मुरादाबाद में आशु उर्फ मोंटी के खिलाफ कार्रवाई हुई। उधम सिंह गैंग के इस कथित शार्प शूटर पर 36 मुकदमे दर्ज बताए गए थे। एक व्यापारी से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और जानलेवा हमले के मामले में फरार आशु मुठभेड़ में घायल हुआ और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
13 मई को मेरठ में एक लाख रुपये के इनामी जुबैर को एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। वह एएमयू के शिक्षक राव दानिश हिलाल की हत्या सहित तीन दर्जन से अधिक मामलों में वांछित बताया गया था। लोहिया नगर क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई ने एसटीएफ की उस क्षमता को सामने रखा जिसमें अलग-अलग जिलों में सक्रिय गंभीर अपराधियों तक पहुंचकर कार्रवाई की जाती है।
जून का महीना भी एसटीएफ के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। 7-8 जून की रात अयोध्या के थाना महराजगंज क्षेत्र में एक लाख रुपये के इनामी भानु प्रताप सिंह उर्फ बब्लू को मुठभेड़ में मार गिराया गया। सुपारी किलिंग, हत्या और रंगदारी जैसे मामलों में उसका नाम सामने आया था।
22 जून को सहारनपुर के सरसावा में एक लाख रुपये के इनामी लल्लन सिंह का अंत हुआ। बिहार की न्यायिक अभिरक्षा से फरार यह अपराधी उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था और 2022 में वाराणसी के रोहनियां में क्षेत्र में दरोगा की गोली मारकर पिस्टल लूट फरार था, नवम्बर 2022 में इस दो सगे भाई वाराणसी में हुई पुलिस मुठभेड़ में मारे गये थे।
27 जून को लखनऊ के किसान पथ क्षेत्र में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में संजीव कुमार उर्फ संजय उर्फ संजू मारा गया। उसे दिलीप वर्मा और खान मुबारक गैंग का मुख्य शूटर तथा बिल्डर संदीप सिंह हत्याकांड का प्रमुख आरोपी बताया गया था। राजधानी क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत थी कि एसटीएफ संगठित अपराध के नेटवर्क पर लगातार निगरानी बनाए हुए है।
जुलाई में भी अभियान जारी रहा। 7 जुलाई को अंबेडकरनगर में एसटीएफ नोएडा की टीम ने एक लाख रुपये के इनामी विक्की उर्फ आसिम अली उर्फ पेंदा को मुठभेड़ में मार गिराया। उसे छैमार गैंग का सक्रिय सदस्य और डकैती के दौरान हिंसक वारदातों के लिए कुख्यात बताया गया था।
13 जुलाई को गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र में 15 वर्षों से फरार मुस्तफीजुल हसन उर्फ बाबू मुठभेड़ में मारा गया। हत्या और जानलेवा हमले जैसे गंभीर मामलों में वांछित इस अपराधी के लंबे समय तक कानून की गिरफ्त से बाहर रहने के बाद एसटीएफ की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी गई।
25 जुलाई को बागपत में हुई कार्रवाई के साथ इस सूची में दसवां नाम जुड़ा। 50 हजार रुपये के इनामी विपुल उर्फ खूनी को एसटीएफ मेरठ और बागपत पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मार गिराया गया। उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात सुशील मूंछ गैंग का सक्रिय शार्प शूटर बताया गया था और उसके खिलाफ 38 मुकदमों का उल्लेख किया गया था।
इन दस कार्रवाइयों को केवल मुठभेड़ों के आंकड़े के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इनके पीछे एसटीएफ की खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता, अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी, विभिन्न जिलों की पुलिस के साथ समन्वय और तेजी से ऑपरेशन को अंजाम देने की क्षमता भी दिखाई देती है।
एसटीएफ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह संदेश देने में है कि अपराध का नेटवर्क चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, कानून से ऊपर कोई नहीं है। इनामी बदमाशों पर लगातार कार्रवाई से उन अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनता है जो लंबे समय से फरारी काट रहे हैं या गिरोहों के सहारे अपना साम्राज्य खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि किसी भी पुलिस मुठभेड़ की सफलता का अंतिम मूल्यांकन हमेशा कानून, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के व्यापक मानकों पर होना चाहिए। पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता, स्वतंत्र जांच, नागरिक अधिकारों का सम्मान और प्रत्येक घटना की विधिक समीक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही संतुलन पुलिस की कार्रवाई को मजबूत जनविश्वास प्रदान करता है
2026 में सामने आए ये दस मामले फिलहाल एक बात जरूर बताते हैं—उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ एसटीएफ का अभियान लगातार सक्रिय है। पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजधानी लखनऊ से लेकर अयोध्या, गोरखपुर और अंबेडकरनगर तक हुई कार्रवाइयों ने अपराध जगत में हलचल पैदा की है।
यूपी एसटीएफ की इन कार्रवाइयों ने एक स्पष्ट संदेश दिया है: अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, कितना भी बड़ा गैंग उसके पीछे हो और कितने ही वर्षों से फरार क्यों न हो, कानून की पहुंच से बाहर रहना आसान नहीं है। यही वजह है कि वर्ष 2026 में यूपी एसटीएफ को अपराधियों के खिलाफ प्रदेश की सबसे प्रभावी और आक्रामक पुलिस इकाइयों में गिना जा रहा है।








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