” महाशिवरात्रि के पूर्व नमामि गंगे ने केदार घाट पर चलाया स्वच्छता अभियान, शिव संदेश के बारे में बताया “
” गौरी केदारेश्वर की उतारी आरती, भारत की सुख समृद्धि का मांगा आशीर्वाद “

ब्रह्मांड के सबसे बड़े पर्यावरणविद् भगवान शिव की उपासना का पर्व महाशिवरात्रि प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता है । भगवान शिव के परिवार का प्रकृति से विशेष लगाव और संबंध माना जाता है । प्रकृति का साज-संभाल ही शिवत्व है उक्त बातों का संदेश देते हुए महाशिवरात्रि के एक दिन पूर्व शनिवार को केदार घाट पर विशेष सफाई अभियान चलाया गया ।
गौरी केदारेश्वर की आरती उतारकर भारत की सुख समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा गया। केदार घाट पर प्रतिष्ठित शिव कचहरी और घाटों की सफाई के साथ जागरूकता की गई। स्वच्छता अभियान के तहत गंगा किनारे जगह-जगह पड़े हुए कूड़े कचरे को भी नमामि गंगे के सदस्यों ने उनके सही स्थान तक पहुंचाया। घाटों पर श्रमदान के बाद वहां उपस्थित पर्यटकों और आम लोगों को गंगा और घाटों स्वच्छ रखने की शपथ भी दिलाई गई। पतित पावनी मां गंगा की अविरल धारा को निर्मलता के साथ बहने और उनको हमेशा स्वच्छ रखने के लिए सभी संकल्पबद्ध हुए। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि भगवान शिव दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणविद हैं। भगवान शिव प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हैं क्योंकि वे स्वयं प्रकृति के तत्व हैं । पंचतत्वों (पृथ्वी , जल, वायु, अग्नि, आकाश) से शिव का जुड़ाव हमें उनके माध्यम से प्रकृति के सम्मान और संरक्षण का बोध कराता है, जैसे गंगा जल का प्रबंधन और पार्थिव शिवलिंग की पूजा। इस प्रकार, शिव की पूजा केवल रस्म नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और उसके संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें हर व्यक्ति को प्रकृति के लिए छोटे-छोटे कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला, आयुष गुप्ता, सुषमा गुप्ता, ऋषिका सिंह, तरक्ष सिंह एवं श्रद्धालु शामिल रहे।








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